Thursday, December 26, 2019

भारत में नागरिकता दी और छीनी कैसे जाती है?

नागरिकता क़ानून में संशोधन के बाद से ही पूरे देश में विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं और ये माँग उठ रही है कि 'सरकार शरणार्थियों को भारतीय नागरिकता देने वाले इस नए क़ानून को वापस ले क्योंकि यह संवैधानिक भावना के विपरीत है और भेदभावपूर्ण है'.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह

इसे लेकर देश के कई शहरों में विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं और अलग-अलग प्रदर्शनों में हुई हिंसक घटनाओं में अब तक 20 से ज़्यादा लोग मारे गए हैं.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह

सोशल मीडिया पर भी नए नागरिकता क़ानून की चर्चा है और गूगल पर लोग 'भारतीय नागरिकता अधिनियम' के बारे में लगातार सर्च कर रहे हैं.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह

क्या है नागरिकता अधिनियम?
नागरिकता अधिनियम, 1955 संविधान लागू होने के बाद भारतीय नागरिकता हासिल करने, इसके निर्धारण और रद्द करने के संबंध में एक विस्तृत क़ानून है. उसे आसान भाषा में समझाने की कोशिश.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह

यह अधिनियम भारत में एकल नागरिकता का प्रावधान करता है यानी भारत का नागरिक किसी और देश का नागरिक नहीं हो सकता.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह

इस अधिनियम में वर्ष 2019 से पहले पाँच बार संशोधन (वर्ष 1986, 1992, 2003, 2005 और 2015 में) किया जा चुका है.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह

नवीनतम संशोधन के बाद इस अधिनियम में बांग्लादेश, अफ़ग़ानिस्तान और पाकिस्तान के छह अल्पसंख्यक समुदायों (हिंदू, बौद्ध, जैन, पारसी, ईसाई और सिख) से ताल्लुक़ रखने वाले लोगों को भारतीय नागरिकता देने का प्रावधान किया गया है.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह

इसी तरह पिछले संशोधनों में भी नागरिकता दिए जाने की शर्तों में कुछ मामूली बदलाव किए जाते रहे हैं.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह

भारतीय नागरिकता अधिनियम, 1955 के अनुसार कुछ प्रावधानों के अंतर्गत भारत की नागरिकता ली जा सकती है.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह

भारत का संविधान लागू होने यानी कि 26 जनवरी, 1950 के बाद भारत में जन्मा कोई भी व्यक्ति 'जन्म से भारत का नागरिक' है. इसके एक और प्रावधान के अंतर्गत 1 जुलाई 1987 के बाद भारत में जन्मा कोई भी व्यक्ति भारत का नागरिक है, यदि उसके जन्म के समय उसके माता या पिता (दोनों में से कोई एक) भारत के नागरिक थे.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह

दूसरा प्रावधान वंशानुक्रम या रक्त संबंध के आधार पर नागरिकता देने का है.
इस प्रावधान के अंतर्गत एक शर्त ये है कि व्यक्ति का जन्म अगर भारत के बाहर हुआ हो तो उसके जन्म के समय उसके माता या पिता में से कोई एक भारत का नागरिक होना चाहिए.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह

दूसरी शर्त ये है कि विदेश में जन्मे उस बच्चे का पंजीकरण भारतीय दूतावास में एक वर्ष के भीतर कराना अनिवार्य है. अगर वो ऐसा नहीं करते तो उस परिवार को अलग से भारत सरकार की अनुमति लेनी होगी.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह

इस प्रावधान में माँ की नागरिकता के आधार पर विदेश में जन्म लेने वाले व्यक्ति को नागरिकता देने का प्रावधान नागरिकता संशोधन अधिनियम 1992 के ज़रिए किया गया था.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह

अवैध प्रवासी को छोड़कर अगर कोई अन्य व्यक्ति भारत सरकार को आवेदन कर नागरिकता माँगता है, तो ये कुछ विधियाँ हैं जिनके आधार पर उसे नागरिकता दी जा सकती है.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह

1. भारतीय मूल का वो शख़्स जो देश में नागरिकता के लिए आवेदन देने के पहले भारत में कम से कम 7 साल रह रहा हो.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह

2. भारतीय मूल का वो व्यक्ति जो अविभाजित भारत के बाहर किसी देश का नागरिक हो. मतलब ये कि व्यक्ति पाकिस्तान और बांग्लादेश से बाहर किसी अन्य देश का नागरिक हो, और उस नागरिकता को छोड़कर भारत की नागरिकता चाहता हो.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह

3. वो शख़्स जिसकी शादी किसी भारतीय नागरिक से हुई हो और वो नागरिकता के आवेदन करने से पहले कम से कम सात साल तक भारत में रह चुका हो.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह

4. वो नाबालिग़ बच्चे जिनके माता या पिता भारतीय हों.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह

5. राष्ट्रमंडल के सदस्य देशों के नागरिक जो भारत में रहते हों या भारत सरकार की नौकरी कर रहें हों, आवेदन पत्र देकर भारत की नागरिकता प्राप्त कर सकते हैं.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह

चौथा प्रावधान भूमि-विस्तार के ज़रिए नागरिकता देने का है. यदि किसी नए भू-भाग को भारत में शामिल किया जाता है, तो उस क्षेत्र में निवास करने वाले व्यक्तियों को स्वतः भारत की नागरिकता मिल जाएगी. मिसाल के तौर पर 1961 में गोवा को, 1962 में पुद्दुचेरी को भारत में शामिल किया गया तो वहाँ की जनता को भारतीय मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रहनागरिकता प्राप्त हो गई थी.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह
पाँचवां प्रावधान नेचुरलाइज़ेशन के ज़रिए नागरिकता देने का है. यानी देश में रहने के आधार पर भी कोई व्यक्ति भारत में नागरिकता हासिल कर सकता है. बशर्ते वो नागरिकता अधिनियम की तीसरी अनुसूची की सभी योग्यताओं पर खरा उतरता हो.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह
ज़ाहिर है, यह पूरा क़ानून नहीं है, पूरा क़ानून काफ़ी विस्तृत है और यहाँ मोटे तौर पर जानकारी दी गई है, कई शर्तें और डिस्क्लेमर हैं उनके बारे में जानने के लिए पूरा क़ानून पढ़ें.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह

नागरिकता अधिनियम, 1955 की धारा-9 में किसी व्यक्ति की नागरिकता ख़त्म करने का भी ज़िक्र किया गया है.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह

तीन तरीक़े हैं जिनके ज़रिए किसी व्यक्ति की भारतीय नागरिकता समाप्त हो सकती है.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह

यदि कोई भारतीय नागरिक स्वेच्छा से किसी और देश की नागरिकता ग्रहण कर ले तो उसकी भारतीय नागरिकता स्वयं ही समाप्त हो जाएगी.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह

यदि कोई भारतीय नागरिक स्वेच्छा से अपनी नागरिकता का त्याग कर दे तो उसकी भारतीय नागरिकता समाप्त हो जाएगी.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह

भारत सरकार को भी निम्न शर्तों के आधार पर अपने नागरिकों की नागरिकता समाप्त करने का अधिकार है.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह

Tuesday, December 17, 2019

नागरिकता संशोधन क़ानून और एनआरसी है क्या?

जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 को समाप्त किए जाने और उसे दो केंद्र शासित प्रदेशों में विभाजित करने के बाद मोदी सरकार को संसद में दूसरी बड़ी कामयाबी मिली जब उसने नागरिकता संशोधन विधेयक (सीएबी) को दोनों सदनों से पारित करा लिया.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह

राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के बाद अब ये क़ानून बन चुका है. लेकिन संसद से पारित होने के बाद भी इस कानून को लेकर जारी चर्चा थमी नहीं है. इस क़ानून के विरोध में देश के कई हिस्सों में विरोध-प्रदर्शन शुरू हुआ है.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह

इसकी शुरुआत हुई पूर्वोत्तर भारत से. ख़ास तौर से असम में इसे लेकर बड़े पैमाने पर विरोध-प्रदर्शन हुए. इसके बाद अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी, दिल्ली की जेएनयू और जामिया यूनिवर्सिटी में भी प्रदर्शन हुए.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह

अब सवाल उठता है कि आख़िर इस क़ानून में क्या है, जिसे लेकर विवाद इतना बढ़ गया है. इस क़ानून के मुताबिक़ पड़ोसी देशों से शरण के लिए भारत आए हिंदू, जैन, बौद्ध, सिख, पारसी और ईसाई समुदाय के लोगों को भारतीय नागरिकता देने का प्रावधान है.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह

हालांकि क़ानून बनने से पहले इसके बिल को लेकर विपक्ष बेहद कड़ा रुख़ अख़्तियार किया था और इसे संविधान की भावना के विपरीत बताया था.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह

भारत के पूर्वोत्तर में नागरिकता संशोधन क़ानून को लेकर विरोध होता रहा है जिसका उद्देश्य पड़ोसी देशों पाकिस्तान, अफ़ग़ानिस्तान और बांग्लादेश से ग़ैर-मुसलमान अवैध प्रवासियों को भारतीय नागरिकता प्रदान करने के लिए नियमों में ढील देने का प्रावधान है.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह

इस बार भले ये क़ानून बन गया हो लेकिन इससे पहले भी मोदी सरकार ने इसे पास कराने की कोशिश की थी. मोदी सरकार के पहले कार्यकाल के दौरान इसी वर्ष 8 जनवरी को यह लोकसभा में पारित हो चुका है.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह

लेकिन इसके बाद पूर्वोत्तर में इसका हिंसक विरोध शुरू हो गया, जिसके बाद सरकार ने इसे राज्यसभा में पेश नहीं किया. सरकार का कार्यकाल पूरा होने के साथ ही यह विधेयक स्वतः ख़त्म हो गया.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह

मई में नरेंद्र मोदी की सरकार का दूसरा कार्यकाल शुरू हुआ. इस दौरान अनुच्छेद 370 समेत कई बड़े फ़ैसले किए गए और अब नागरिकता संशोधन विधेयक भी क़ानून बन गया है.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह

संसद में इसे विधेयक के रूप में पेश करने से पहले ही पूर्वोत्तर में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए थे.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह

वैसे तो नागरिकता संशोधन क़ानून का असर पूरे देश में होना है लेकिन इसका विरोध पूर्वोत्तर राज्यों, असम, मेघालय, मणिपुर, मिज़ोरम, त्रिपुरा, नगालैंड और अरुणाचल प्रदेश में ज़्यादा हुआ. और जब छात्रों ने इसका विरोध शुरू किया है, तो इसकी आंच देश के अलग-अलग विश्वविद्यालयों तक पहुंची.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह

इन राज्यों में इसका विरोध इस बात को लेकर हो रहा है कि यहां कथित तौर पर पड़ोसी राज्य बांग्लादेश से मुसलमान और हिंदू दोनों ही बड़ी संख्या में अवैध तरीक़े से आ कर बस जा रहे हैं.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह

विरोध इस बात का है कि वर्तमान सरकार हिंदू मतदाताओं को अपने पक्ष में करने की फिराक में प्रवासी हिंदुओं के लिए भारत की नागरिकता लेकर यहां बसना आसान बनाना चाहती है.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह

सरकार की तरफ से जो विधेयक पेश किया गया था उसमें दो अहम चीज़ें थीं - पहला, ग़ैर-मुसलमान प्रवासियों को भारतीय नागरिकता देना और दूसरा, अवैध विदेशियों की पहचान कर उन्हें वापस भेजना, जिनमें ज़्यादातर मुसलमान हैं.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह

गृह मंत्री अमित शाह ने 20 नवंबर को सदन को बताया था कि उनकी सरकार दो अलग-अलग नागरिकता संबंधित पहलुओं को लागू करने जा रही है, एक सीएए और दूसरा पूरे देश में नागरिकों की गिनती जिसे राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर या एनआरसी के नाम से जाना जाता है.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह

अमित शाह ने कहा था कि CAA में धार्मिक उत्पीड़न की वजह से बांग्लादेश, पाकिस्तान, अफ़ग़ानिस्तान से 31 दिसंबर 2014 से पहले भारत में आने वाले हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाइयों को नागरिकता प्रदान करने का प्रावधान है.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह

उन्होंने बताया था कि एनआरसी के जरिए 19 जुलाई 1948 के बाद भारत में प्रवेश करने वाले अवैध निवासियों की पहचान कर उन्हें देश से बाहर करने की प्रक्रिया पूरी की जाएगी.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह

मूल रूप से एनआरसी को सुप्रीम कोर्ट की तरफ से असम के लिए लागू किया गया था. इसके तहत अगस्त के महीने में यहां के नागरिकों का एक रजिस्टर जारी किया गया. प्रकाशित रजिस्टर में क़रीब 19 लाख लोगों को बाहर रखा गया था. जिन्हें इस सूची से बाहर रखा गया उन्हें वैध प्रमाण पत्र के साथ अपनी नागरिकता साबित करनी थी.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह

पूर्वोत्तर में व्यापक विरोध प्रदर्शन के बावजूद नागरिकता संशोधन विधेयक को लेकर आगे भाजपा आगे क्यों बढ़ी, इसकी वजह इस पूरे क्षेत्र में पार्टी को मिली चुनावी सफलता है.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह

जब केंद्र सरकार अपने पहले कार्यकाल के दौरान इस विधेयक को पास करवाने की कोशिश में लगी थी तब पूर्वोत्तर में कई समूहों ने बीजेपी का विरोध किया था.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह

लेकिन, जब 2019 के चुनाव परिणाम आए तो पूर्वोत्तर में बीजेपी और इसकी सहयोगी पार्टियों ने अच्छा प्रदर्शन किया.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह

समूचे पूर्वोत्तर की 25 संसदीय सीटों में से बीजेपी और उसकी सहयोगी पार्टियों को 18 पर जीत मिली.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह

बीजेपी को इस बात की उम्मीद है कि हिंदुओं और ग़ैर-मुसलमान प्रवासियों को आसानी से नागरिकता देने की वजह से उसे बहुत बड़ी संख्या में हिंदुओं का समर्थन मिलेगा.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह

(बीबीसी मॉनिटरिंग दुनिया भर के टीवी, रेडियो, वेब और प्रिंट माध्यमों में प्रकाशित होने वाली ख़बरों पर रिपोर्टिंग और विश्लेषण करता है. आप बीबीसी मॉनिटरिंग की ख़बरें ट्विटर और फ़ेसबुक पर भी पढ़ सकते हैं.)मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह

Monday, December 9, 2019

BBC金牌大腕主持英国女王老朋友大卫·艾登堡

世界级常青藤偶像、自然学家、顶级电视制片人、BBC金牌主持人、作家、英国国宝、英国女王的老朋友……

何人赚来如此显赫的一个名份就足够骄傲了,而他有这样一串响当当的名头。岁月除了让他满头白发,还给他攒下了一部又一部轰动世界的电视精品,在93岁的高龄,仍然继续推出风靡全球的鸿篇巨制。

他就是大卫 艾登堡(David Attenborough),一个在英国家喻户晓、在全世界圈粉无数的巨星。

今年10月,由他主持的纪录片《七个世界,一个星球》(Seven Worlds, One Planet)在全世界各地几乎同步播出,再次震撼人心。

亚马逊旗下的网路电影资料库(IMDb),各国观众们为此片打出了接近满分的9.6高分,而在中国观众评分的豆瓣排行榜上,这部纪录片得分更高,是9.8的超高分。

但拿下高分的艾登堡纪录片还有很多:《脉动地球》1、2季(Planet earth)、《我们的星球》(Our Planet)、《蓝色星球》(Blue Planet 2)、《王朝》(Dynasties)、《冰冻星球》(Frozen Planet)……

这些,只是艾登堡名下近年来轰动世界的纪录片而已。从他加入英国广播公司BBC参加动物节目的制作,到如今BBC的自然纪录片独步天下,他在幕前幕后立下汗马功劳。

因为他的成就,英国女王封他为爵士,英国一艘北极考察船以他命名,亿万年前的一种恐龙被称为“艾登堡恐龙”。

2016年,艾登堡爵士90大寿时,英国自然博物馆、伦敦动物园、英国广播公司BBC纷纷展开活动,为他庆祝生日。

艾登堡爵士除了为BBC的纪录片解说,究竟还做了什么,打造了如此超凡脱俗的“江湖地位”?

1926年5月8日, 艾登堡出生在伦敦附近,他的父亲是一所地方大学的校长;

中学就读文法学校的艾登堡,1945年以优异的成绩,赢得奖学金进入剑桥大学学习,主修地理和动物学,获得自然科学学位;

1947年大学毕业后,他在英国海军服兵役两年;

1949年,艾登堡入职一家教育出版社工作;1950年,艾登堡结婚成家;

1952年,他完成了英国广播公司BBC的培训,成为一个电视制作人。

1972年,他成为BBC总裁的热门人选。然而,对自然情有独钟的艾登堡, 也就是在此时辞去了BBC的行政工作,全身心投入野生世界纪录片的制作。

艾登堡爵士与英国女王伊丽莎白二世,常常被人们称为老朋友。这两位在英国无人不晓的人物,都出生在1926年,至今已经有半个多世纪的友谊。

追溯艾登堡爵士与王室的友谊,可以找到1958年查尔斯王子和安妮公主到BBC电视摄影棚参观时,艾登堡爵士给他们看鹦鹉的照片。

Monday, December 2, 2019

हैदराबाद: रेप कब तक हैशटैग पर सिमटते रहेंगे?

लात्कार जैसे जघन्य अपराध की ख़बरें सामने आते ही इंटरनेट पर लोगों को अपनी भावनाएं ज़ाहिर करने एक नया हैशटेग मिल जाता है.

हैदराबाद में महिला डॉक्टर के साथ रेप और हत्या की ख़बर सामने आने के बाद भी ऐसा ही हुआ.

ये ख़बर आते ही ट्विटर पर एकाएक कई हैशटैग वायरल होने लगे.

हज़ारों-हज़ार लोगों ने इस हैशटैग के साथ ट्वीट शुरू कर दिया.

हर बलात्कार बस एक आँकड़ा

भारत में बलात्कार की हर घटना साल-दर-साल काग़ज के पन्नों में दर्ज होते आँकड़ों में शामिल हो जाती है.

बेगुनाह पीड़िताओं के साथ हुए जु़ल्म की कहानी एक हैशटैग में सिमट कर रह जाती है.

ऐसे में हम धीरे-धीरे एक ऐसे समाज के रूप में उभर रहे हैं जो कि प्रगति के रास्ते पर आगे बढ़ने की जगह पिछड़ता हुआ दिख रहा है.

हमने अपनी बच्चियों को गुड टच की शिक्षा दी. लेकिन ऐसा करके भी हम अपनी बच्चियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में असफल रहे है.

मैं मानती हूं कि हमें अपने समाज के पुरुषों को महिलाओं की शारीरिक बनावट के बारे में समझाने की ज़रूरत है.

हमें अपने पुरुषों को ये बताने की ज़रूरत है कि महिलाएं सिर्फ एक माँ, बहन और पत्नी नहीं हैं. बल्कि, वे खुद में एक जीती-जागती शख्सियत हैं. और उन्हें वैसे ही देखे जाने की ज़रूरत हैं.

उन्हें ये बताए जाने की ज़रूरत है कि महिलाएं भोग की वस्तु नहीं हैं.

मेरा मन इस बात को मानने को तैयार ही नहीं होता है कि जिस देश में लक्ष्मी, दुर्गा और तमाम दूसरी पौराणिक महिलाओं की देवियों के रूप में पूजा की जाती है.

उन्हें पुरुष देवताओं के साथ बराबरी की जगह दी जाती है. मंदिर में विशेष स्थान दिया जाता है. और पुरुष समाज भी बड़े श्रद्धा भाव के साथ इन देवियों की पूजा करता है.

ऐसे में इन्हीं देवियों के इंसानी स्वरूप को अपने ही चार-दीवारी में और अपने ही बिस्तर पर अपने इसी पुरुष समाज की ओर से इतने जुल्मों-सितम बर्दाश्त क्यों करने पड़ते हैं.

हैदराबाद में रेप का शिकार होने वालीं महिला एक पढ़ी लिखी युवती थीं जो कि उस रोज़ हर रोज़ की तरह अपने काम से बाहर गई थीं. इसके बाद बर्बर तरीके से उसका रेप और हत्या की गई.

लगभग इसी समय एक अन्य शहर में एक बच्ची अपने जन्मदिन पर मंदिर जाती है और उसके ही सहपाठी उसका बलात्कार करके उसकी हत्या कर देते हैं.

हम उनके कपड़ों और घर से बाहर निकलने के समय के लिए उन्हें दोषी नहीं ठहरा सकते हैं.

ये ख़बरें पढ़कर मेरा खून खौल उठता है.

एक नागरिक होने के नाते मैं ज़्यादा से ज़्यादा सोशल मीडिया पर जाकर अपना गुस्सा व्यक्त कर सकती हूं.